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सिनेमा के परदा से हटि के आजु भोजपुरी संसार के सिनेमा
विशेषांक का जरिये रउरा सभन से सीधे बतिआवे के मउका मिलल बा। बाकिर हमरा ई नइखे
बुझात कि हम बात कहँवा से शुरु करीं। एही से सबसे बढिया इहे बा कि भोजपुरी
सिनेमा पर खुल के बात कइल जाव। आजु भोजपुरी सिनेमा करोबार के जवन मजबूत
स्थिति बनल बा ओकरा पीछे झकला के जरुरत बा। अबहीं ले आपन बोली भोजपुरी के लोगन के
विचार नीमन ना रहे। लोग एह भाषा के बोलनिहारन के पिछड़ल बूझत रहे। बाकिर आजु
भोजपुरी सिनेमा के बलिहारी बा कि अब भोजपुरी के सम्मान से देखत बा लोग।
ई एगो सोचें वाला बात बा कि उहे भोजपुरी आजुओ बा
बाकिर अइसन कवन करिश्मा हो गइल बा कि लोग बाग एकरा के सम्मान देवे लागल? असल मे
आपन बोली के मरम अबहीं ले भोजपुरिया लोग अपनें ले बूझत रहे लेकिन जबसे भोजपुरी
सिनेमा लोगन मे आपन भाषा से लगाव जगावे लागल तबसे ना खाली एकर परचारे परसार बढल
बा बलुक ई एगो आन्दोलन बनि गइल बा। जे आजु ले एह बोली पर आपन नाक सिकोरत रहे,
अब हायफ बा।
भोजपुरी सिनेमा के कद बढल बा। अब हिन्दी सिनेमा के लोग भी भोजपुरी सिनेमा से
जुड़ गइल बा। भोजपुरी सिनेमा में काम करे खातिर अब हिन्दी सिनेमा के लोग तत्पर
बा। जे भोजपुरी जानतो नइखे ऊ भोजपुरी फिलिम बनावत बा। अब रउरा सभन से बतावत हमरा
खुशी होत बा कि जवना तरीका से एह सभ मे तेजी बा ओसे भोजपुरी फिलिम इन्डस्टरी के
लगभग तीस गजार लोगन के हाथ मे काम बा आ लोगन के घर के चूल्हा जरत बा।हमार त ई
सभ देखि के एतना मन गदगद बा कि का कही। हम जवना घरी भोजपुरी सिनेमा मे काम करके
एकरा के आगे लिआवे के कोशिश मे लागल रही। ऊ अब आपन रंग देखावल शुरु कर देलें
बा। बाकिर हमरे इहो मालूम बा कि हमार परयाश णोजपुरिया लोगन के सहयोग के बिना
आपन रंग बेल्कुल ना देखाआत।
आखिर में रउवा सभन से हमार निहोरा बा कि आपन बोली के परितिष्ठा खातिर अइसहीं
सहजोग करीं सभे। आज एकरे दरकार बा।
रवि किशन शुक्ल
अतिथि संपादक
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