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भोजपुरी संसार पञिका के पहिलका अंक जब हमरा हा्थे लागल आ
ओकरा पर आपन बोली में आपन पञिका लिखल पढनीं त अईसन बुझाइल जइसे अब मन के बात
खाली सुनले ना बलुक पढलो जा सकल जाला। हम एह के जिकिर लखनऊ में आयोजित भोजपुरी
महोत्सव के मंच से कइबो कइनी आ आजु फेर करत बानी कि भोजपुरी बोलनिहार,सुननिहार
त देश में करोड़ों लोग बा। बाकिर भोजपुरी के पढनिहारों के ओतनें जरुरत बा।
भोजपुरी संसार पञिका में बइसे त फिलिम,समाज,खेला,साहित्य,धर दुबार,परब तेवहार आ
बर बेमारी के बारे में चरचा कइले जात बा। तबहूँ पञिका के आउर बढिया आ
आकर्षक बनावे
के कोशिश लगातार जारी बा।
हमरा से केहू कहल कि भोजपुरियन में कींन के पढे के आदत ना होला त हमरा बहुत
बाउर लागल। हम ओकरा के चट से जबाबो दे देहलीं कि हिन्दी के पञिकन के पढनिहारन
में भोजपुरियन के बहुते योगदान बा। त आपन बोली के पञिका काहे ना पढी लोग। हमार
आपना भोजपुरिया लोगन से ए संपादकीय के जरिये निहोरा बा कि रउवा लोग आपन बोली के
आपन पञिका के कामयाब बनावे खातिर आपन पूरा सहजोग दिहीं सभे।एकरा अलावे पञिका के
आउर रोचक बनावे में पाठकन के सुझाव आ राय के दरकार बा।
आदमी के पहचान ओकर बोलिये से होला आ बोलिये आदमी के संस्कृति के पहिचान करावेला।
एहीसे अपना लोग से आपन बोली में बतिअउला से आपन माटी के गमक नीके तरी महसूसल जा
सकेला। हम बूझत बानी कि अब बेसी कहला के दरकार नइखे।
ई अंक रउआ हाथे में बा एकरा के पढि के सही आकलन कइला के काम बा। पञिका के अगिला
अंक महापरब छटि मईया पर बिशेष रुप से निकालल जाई। जामे छटि मईया के महिमा,पूजा
आ विधान के बारे मे बिस्तार से चरचा होखी।
एक बार फेर सबकरा से हम इहे उम्मेद करत बानी कि एगो जागरुक पाठक बनि के आपन बोली
के साथे आगे बढीं सभे।
मनोज तिवारी "मृदुल"
अतिथि संपादक
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