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गोरखपुर में भोजपुरी फिल्म की शूटिंग

भोजपुरी फिल्म उद्योग का कारोबार आज सौ करोड़ रुपये से अधिक
का हो गया है। बालीवुड के बड़े स्टार भी भोजपुरी सिनेमा कर रहे हैं। लेकिन
भोजपुरी फिल्म बनाने के लिए पूर्वाचल में कोई सुविधा नहीं है। इस लिए यह समय की
मांग है कि पूर्वाचल में मुम्बई की तरह फिल्म सिटी का निर्माण जितना जल्दी हो
सके किया जाय। निर्माणाधीन भोजपुरी फिल्म काहां जइबअ राजा नजरिया लड़ाइके के
निर्माता सुनील बूबना ने ये बातें गोरखपुर में कहीं।
श्री बूबना ने कहा कि 1998 में उत्तर-प्रदेश सरकार ने प्रदेश में फिल्मी
गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए उत्तर-प्रदेश फिल्म नीति का निर्माण किया
गया। प्रदेश के अफसरों ने मुम्बई का दौरा किया और निर्माताओं से मिलकर उन्हें
अपनी फिल्मों की शूटिंग उत्तर-प्रदेश में आकर करने का आग्रह किया। इसके बदले
निर्माताओं को अनुदान व टैक्स फ्री की सुविधा भी देने का वादा किया गया। प्रदेश
की आकर्षक फिल्म नीति से विशेष रूप से भोजपुरी फिल्म निर्माता काफी प्रभावित
हुए। प्रदेश में शूटिंग का कोई आधारभूत ढांचा न रहने के बावजूद भोजपुरी फिल्म
निर्माताओं ने उत्तर-प्रदेश में आकर अपनी फिल्मों की शूटिंग शुरू की। शुरूआती
दौर में भोजपुरी फिल्म निर्माताओं को अनुदान व टैक्स फ्री की सुविधा मिली भी
लेकिन बाद में उत्तर-प्रदेश की फिल्म नीति हाथी का दांत साबित हुआ। आज भोजपुरी
फिल्म निर्माता उत्तर-प्रदेश की फिल्म नीति से हताश व निराश हैं। वह जो कुछ भी
कर रहे हैं, अपने बल पर कर रहे हैं। प्रदेश सरकार से किसी तरह के सहयोग की आशा
वह छोड़ चुके हैं।
श्री बूबना ने कहा कि उन्होंने अपनी पहली भोजपुरी फिल्म सुहागन बना दअ सजना
हमार की शूटिंग गोरखपुर में की लेकिन प्रदेश सरकार से सहयोग के नाम पर उन्हें
कुछ नहीं मिला। उन्होंने अपनी तीसरी भोजपुरी फिल्म काहां जइबअ राजा नजरिया
लड़ाइके की शूटिंग गोरखपुर में शुरू करने के पूर्व अनुदान व टैक्स फ्री की
सुविधा प्राप्त करने के लिये अपनी फिल्म की शूटिंग करने की जानकारी उत्तर
प्रदेश फिल्म उद्योग बंधु के पास प्रेषित की लेकिन आज तक उन्हें कोई उत्तर नहीं
मिला। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्तर प्रदेश फिल्म उद्योग बंधु से
जुड़े अधिकारी व कर्मचारी कितने जागरूक और सक्रिय हैं।
श्री बूबना ने कहा कि प्रदेश सरकार को यह बात अच्छी तरह समझनी चाहिए कि अन्य
उद्योगों की तरह भोजपुरी सिनेमा भी एक बड़ा उद्योग है। यदि इसे प्रोत्साहन मिले
तो प्रदेश में बेरोजगार नौजवानों को न सिर्फ रोजगार मिलेगा बल्कि यहां के
पर्यटक स्थलों का भी प्रचार-प्रसार हो सकेंगा। उन्होंने कहा कि किसी भी भोजपुरी
फिल्म की शूटिंग के लिये निर्माताओं को मुम्बई से क्रेन, कैमरा तथा अन्य उपकरणों
को ट्रक में भरकर लाना पड़ता है। शूटिंग के लिये यहां कोई आधारभूत ढांचा नहीं
है। यहीं नहीं लोकेशन के अनुसार यहां अन्य सुविधाएं भी नहीं हैं। इसलिये आज
आवश्यकता इस बात की है कि पूर्वाचल में एक फिल्म सिटी की स्थापना की जाय जिससे
कि भोजपुरी फिल्म निर्माताओं को हर तरह की सुविधा मिल सके। जिस दिन पूर्वाचल
में फिल्म सिटी की स्थापना हो जायेगी उस दिन न सिर्फ पूर्वाचल के नौजवानों को
बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध होगा अपितु भोजपुरी फिल्म निर्माताओं को भी काफी
सहूलियत मिलेगी। एक सवाल के जवाब में श्री बूबना ने कहा कि पूर्वाचल में फिल्म
सिटी बनाने के लिये वह एक प्रस्ताव शीघ्र ही प्रदेश सरकार को भेजेंगे। अपनी
तीसरी भोजपुरी फिल्म काहां जइब राजा नजरिया लड़ाइके, के बारे में श्री बूबना ने
कहा कि यह न सिर्फ लव स्टोरी है बल्कि इस फिल्म में अपराधियों व राजनेताओं के
चोली दामन के सम्बंध का भी पर्दाफाश किया गया है। यही नहीं नौजवानों की
बेरोजगारी को भी फिल्म में दर्शाया गया है।
उन्होंने बताया कि फिल्म में कई फाइट सीन हैं जिसको फिल्मानें के लिये उन्होंने
मुम्बई से फाइट मास्टर को बुलाया है। श्री बूबना ने आशा व्यक्त की कि उनकी तीसरी
फिल्म दर्शकों आकर्षित करने में जरूर सफल होगी। मालूम हो कि इस फिल्म में दिनेश
लाल यादव निरहुआ तथा मोनालिसा मुख्य भूमिका में हैं। निर्देशक बाली हैं।
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